Saturday, February 20, 2010

शारुख का पाकिस्तान प्रेम !!!

शारुख खान के बयां पर शिव सेना का विलाप उचित है या नहीं, इस पर मई कोई नयी बहेस करना नहीं चाहता । किन्तु मिस्टर खान की पाकिस्तानी खिलाडियों के प्रति हमदर्दी भरा लहजा मुझे समझ में नहीं आया। सब जानते है की पाकिस्तान के साथ हमारे समबन्ध इस समय जो भी है वो क्यों है ??? और किसकी वजह से है ???? क्या पाकिस्तानी क्रिकेटर पाकिस्तानी शोच से परे है ??? क्या उनमे से किसी ने, और मै यहाँ तक कहना चाहूँगा की किसी रुतबा रखने वाले पाकिस्तानी ने कभी भारतीयओं के प्रति वही हमदर्दी और दोस्ती का बयां दिया है ??? यह पहला मोका नहीं है जब खान महोदय देश के ऊपर धार्मिक बंधुता को तरजीह दे रहे हैं। अगर आप को याद हो तो २० - २० विश्व कप हरने के बाद पाकिस्तानी कप्तान ने दुनिया भर के मुसलमानों से छमा मांगी थी, और दुसरे दिन एक बयान में मिस्टर खान उसके सफाई में बयां देते नजर आये थे । लन्दन में एक सार्वजानिक सभा के दौरान मिस्टर खान के उद्गार थे की हम भारतीय और पाकिस्तानी एक जैसे हैं और सामान सांस्कृतिक मूल्यों का साझा करते है । उसी समय बड़े विश्वास और गर्व से उन्होंने बताया की पाकिस्तान हमारा अच्छा पडोसी है ???? मेरा एक ही अनुरोध है की शिव सेना को वो अपने विचार से सहमत कर पाए या नहीं, शारुख साहब सिर्फ एक उस परिवार को अपनी बात से सहमत करके दिखा दीजिए जिसने २६ / ११, संसद भवन हमले, कारगिल, न जाने कितने बम बिस्फोतो में अपने प्रिये जानो को खोया हो। आप ये बात उन कश्मीरी पंडितो को समझाईये जो अपने देश में ही सरनार्थी का जीवन जी रहे हैं। पाकिस्तान अच्छा पडोसी है ये बात आप कारगिल की विधवा बहनों को समझाईये जिनकी मांग इस नापाक मुल्क की नापाक हरकतों से सूनी हो गयी। क्या इतने सरे घावों के परे है क्रिकेट प्रेम ??? क्या वाकई क्रिकेट राष्ट्र प्रेम से बड़ा मुद्दा है ??? हम दुश्मनों को दोस्ती सिखाते है, नफ़रत में प्यार भरते है क्योकि यही हमारी १०,००० वर्षों की सभ्यता का मूल है। लेकिन पाकिस्तान की ६५ वर्षीय सभ्यता ने उसे पीठ में छुरा घोपना ही शिखाया है, वो दोस्ती प्यार जैसे जुमलों को सिर्फ जुमला ही मानते है। हममें और उनमे कोई समानता नहीं है। शारुख जी कृपया अपनी समझदारी अपने पास ही रखिये। इतने घाव काफी है उनकी नस्ल समझने के लिए..............

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