Tuesday, October 23, 2012




आप सब को दशहरा एवं दुर्गा पूजा की हार्दिक बधाई !!    प्रार्थना करता हूँ की माँ दुर्गा सभी भ्रष्टाचारियों का सर्वनाश करें !! देश का कल्याण हो !!


Sunday, July 29, 2012

नेतृत्व का अकाल ??

क्या भारत इस समय नेतृत्व का  अकाल झेल रहा है ? क्या कोई शसक्त और सछम व्यक्ति आपको सम्पूर्ण राजनैतिक परिवेश में नजर आ रहा है ? जो भारत को आने वाले वर्षों में दशा और दिशा दे पायेगा ? यह प्रश्न आज की परिस्थितियों में भारत के सामने यक्ष प्रश्न है. आज  हम भारत के राजनितिक पटल पर देखते हैं तो निराशा और धुंध की मिलीजुली तस्वीर दिखती है. कौन सी समस्या है जो इस समय भारत के सामने इस समय न हो? देश की सीमाओं की सुरक्षा की समस्या, गृह सुरक्षा, नक्सल वाद, आतंक वाद आर्थिक बदहाली और लगातार बढती महंगाई तो लगातार चर्चा  में रहने वाले मुद्दे है।

                     ये प्रश्न ज्यादा गंभीर है। रोजी रोटी की समस्या से भी ज्यादा. क्योंकि हर समस्या जिससे देश जूझ रहा है वो सब जाकर नेतृत्व की कसौटी है। क्या मुलायम में आपको भविष्य का प्रधान मंत्री दीखता है? मायावती, राहुल गांधी, चिदंबरम या फिर और न जाने कितने नाम काया कोई भी आपके मन में बिस्वास जागते है की ये देश के समक्ष खड़ी समस्यायों का समाधान दे ? 

                                                             या फिर मनमोहन सिंह को ये क और अवसर देंगे ? सोंचिये ........................

Sunday, March 18, 2012

रेल की राजनीती !!

भारतीय रेल पिछले ८ सालों से राजनीती के घनचक्कर में फंसी हुई है. किराया पिछले ८ सालों में नहीं बढाया गया है. सुरक्षा की हालत दयनीय है. सुबिधाओं के नाम पर कुछ नहीं है. बजट के नाम पर प्रति वर्ष की जारही कोरी घोस्नाएं है.
                                हम किस बिश्वस्तारिये रेल परिवहन की बात कर रहे है?? क्या रेल की हालत इस तरह के स्वार्थ प्रेरित और वोट  बैंक आधारित राजनीती से सुधारी जा सकती है?
                                 मै पूंछता हूँ की आम जन लोगों में कितने प्रतिशत येसेलोग होंगे जो किराया बडाये जाने का बिरोध करेंगे....भले ही सुरक्षा के नाम पर उनके जान पर बनी रहे...??? कौन होगा जो अतिरिक्त प्रभार न देना चाहेगा भले सीट पर कोक्रोछ दौड़ते रहें?? कौन होगा जो बढे हुए शुल्क की वापसी चाहेगा भले वासी और सडा हुआ खाना मिलता रहे??

                                            किराये बढे किन्तु सुबिधाये भी, हमारी जेब कटे पर रेल बिस्वस्तारिये हो....कम से कम यात्रा को सीट मिले !! सुरक्षा क आश्वासन तो मिले .......

पर क्या भारत में कभी एसा होगा.......