Monday, February 22, 2010

धन्यवाद गूगल !!!!!!

गूगल इंक का आभार !! उनके इस बेहतरीन कार्य हेतु जिसकी वजह से आज हम भारतीय लोग अपनी मात्र भाषा में इतनी सुबिधा पूर्वक कार्य कर रहे है और विचारो के बेरोकटोक आदान प्रदान हो रहे है। आज जब अंग्रेजी राज है, (अंग्रेजी भाषा) सामान्य जन भी हिंदी के नाम पर झेप महसूस करते है और अंग्रेजी न जानने पर शर्मिंदा और छुब्ध महसूस करते है, ऐसे समय में जब अंग्रेजी ही कंप्यूटर के लिए अनिवार्य सी हो, गूगल का यह कार्य न सिर्फ प्रसंस्निये है अपितु हम हिंदी वालो पर एक ऋण की तरह है। गूगल टीम आपके इस अति सराहनीय कार्य के लिए कोटि कोटि साधुबाद !!!!!

"भारत माता के विभिन्न स्वरुप"
















"स्वतंत्रता संग्राम "

Sunday, February 21, 2010

फिर पाकिस्तान से बातचीत ????

सुन रहा हूँ भारत और पाकिस्तान फिर वातचीत करेंगे। मुंबई तुम्हारे घाव भरे की नहीं ???????? मुंबई ताज हमले के दोषियों को पकड़ने और दण्डित करने पर सरे आम सहयोग न करने और ठेंगा दिखने वालों को फिर बिसलरी और लखनवी बिरयानी खिलने की तयारी हो रही है। मेनन साहब शांतिदूत का रोल हथियाने की आपा धापी में हैं। खद्दर धारियों को आखिर कब अक्कल आयेगी। कुछ स्वाभिमान है तुम लोगोमे या सब धो डाला ????
३ बड़े युद्ध, और न जाने कितने छद्म युद्ध, लाखो शहीद, पर हमारे नेता लोग वार्ता करने से न थके । लाल बहादुर जी ने बात की थी, नतीजा ???? इंदिरा जी ने बात की थी, नतीजा ????? अटल जी ने बात की थी, नतीजा ??????? शायद हम पाकिस्तान की नस्ल पाचन नहीं प् रहे है या फिर अपने शहीदों के खून की गरिमा और सम्मान को भुला चुके है। पिछले एक साल से सरे सम्बन्ध समाप्त है तो कोई वारदात नहीं हो रही है । बातचीत का जिक्र छिड़ा तो पुणे बम ब्लास्ट हो गया। मेनन साहब अपने पूर्व विदेशमंत्री श्री कृष्ण मेनन को भूल गए क्या ????? चीन हमले की तयारी कर रहा था और वे हिंदी चीनी भाई भाई के स्लोगन लिख रहे थे। मेरे दोस्त जितना लूटना खसोटना है लूटो, हम गरीबो के खून पसीने की कमाई पर गुलछर्रे उडाओ लेकिन अपने महत्वाकंछओं के लिए मेरे मातृभूमि के साथ खिलवाड़ मत करो। नहीं चाहिए पाकिस्तान की दोस्ती हमारे लिए सील बोर्डर ही अच्छा है।

आशा और निराशा



आशा ही जीवन है, और हताशा मृत्यु । हे सर्वशक्तिमान परमात्मा के अंशो अपने को पहचानो और निराशा के भंवर से बहार आओ । तुम्हारी सीमा सिर्फ तुम्ही निर्धारित कर सकते हो ।

"उत्तिष्ठति जाग्रत प्राप्यं बरान्निबोध्त "