Sunday, July 18, 2010

उद्यमेन ही सिध्यन्ति



"उद्यमेन ही सिध्यन्ति कार्याणि नहि मनोरथे, नहि सुप्तस्य सिंघस्य प्रविशन्ति मुखे मृगः "

1 comment:

  1. snehi mitro,

    Blog par aane aur utsah vardhan hetu dhanyabad. ummeed hai margdarshan milta rahega.

    Mahesh

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आपके विचारों का स्वागत है.....विल्कुल उसी रूप में कहें जो आप ने सोंचा बिना किसी लाग लपेट के. टिप्पणी के लिए बहुत आभार.