मुझको लौटा दो बचपन का सावन !!!
बचपन भी क्या खूब है ! शायद इश्वर का भी यही स्वरुप है ? छोटा पर विशाल हिर्दय, सब पर स्नेह उड़ेलने को व्याकुल . न दोस्ती की परवाह न दुश्मनी की समझ बचपन भी क्या खूब है!! न जीवन के झंझावातों का भय ...